1"खोखले सिद्धांत, दिशाहीन आदर्श जीवन के लिये पर्याप्त नही है,ये जीवन रोटी से चलता है,बड़ी बड़ी बातों से नही" -विद्रोही 2"दिल से अमीर आदमी कभी ग़रीब नही होता" (सोचों की तुम साथ क्या लाये थे और साथ क्या ले जाओगे) -विद्रोही 3 "ग़लत बातों का विरोध करने की बजाय गर आप चुप है तब आपकी सहनशीलता में नहीं बल्कि आपकी नपुंसकता में इज़ाफा हुआ है" -विद्रोही 4"फिरकापरस्ती के चलते नाम दोनों के ही बदनाम ,चाहे अल्लाह हो या राम" -विद्रोही 5आपकी लाखों बुराईयों के बावजूद आपको दो ही लोग चाह सकते है- पहली आपकी माँ और दूसरे आपके ब्लाइंड सपोर्टर्स 5"विरोधाभास होते ही सोशल साइट्स के रिश्ते ऐसे बिखरते है मानों जैसे की पतझड़ में शाखों से अलग होते पत्ते" -विद्रोही
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जिंदगी की उलझने देखकर मन घबरा सा जाता है लेकिन फिर अगले ही पल ख्याल घरवालों का आता है। बेटे की पढ़ाई और उसका भविष्य सोचकर दिमाग़ थोड़ा सा स्तब्ध हो जाता है। छोटी सी कमाई में खर्चे हजारों के मन इस बात से मेल नही खाता है। माँ-पापा की सेहत,भाई-बहन की फिक्र में दिमाग़ मुझे ही भूल जाता है। पत्नी की शिकायते बहुत है मगर अपनी व्यस्त जीवन शैली में मन ये बात कंहा जान पाता है। सुबह से रात का सफ़र तय करना फिर रात से सुबह की बाट थक कर पड़ा बिस्तर पर दिल समझ ही नही पाता है। गुज़र रही है जिंदगी एक बोझ सी मगर अपनों की खातिर इसे अलविदा भी तो नहीं कहा जाता है। Ranjan